
कारगिल विजय दिवस की पूर्व संध्या पर बलिदानी वीर सैनिकों की याद में कवियों ने किया काव्य पाठ

जागरण संवाददाता, देहरादूनः कारगिल विजय दिवस की पूर्व संध्या पर कवियों ने देश की रक्षा के लिए प्राण न्योछावर करने वाले वीर जवानों को याद कर वीर रस का काव्य पाठ किया। कवि आचार्य कृष्णानंद नौटियाल ने 1962 के चाइना युद्ध में लगातार 72 घंटे लड़ने वाले भारतीय सेना के जवान जसवंत सिंह रावत को याद करते हुए अपनी रचना ‘आज सुनो कहानी अपने हिंदुस्तान की, लड़ा अकेले 72 घंटे ऐसे वीर जवान की’.. की प्रस्तुति देकर श्रोताओं में जोश जगा दिया।
दैनिक जागरण और मिशन-फोर जी प्लस (गो, गंगा, गांव, गायत्री) फाउंडेशन के सहयोग से शुक्रवार को बद्रीपुर जोगीवाला स्थित संस्कार इंटरनेशनल स्कूल में वीर सैनिकों के स्वजन का सम्मान एवं कवि पाठ आयोजित हुआ। जिसमें मुख्य अतिथि बदरी-केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी और विशिष्ट अतिथि (से.नि.) लेफ्टिनेंट जनरल डा. वीके अहलुवालिया पहुंचे। उन्होंने देश की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति देने वाले भारतीय सेना के जवानों को याद किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वीर चंद्र सिंह गढ़वाली के पोते शैलेंद्र बिष्ट गढ़वाली ने की। सैनिक की डायरी शीर्षक पर डा. नवनीत सिंह ने सुनाया कि ‘मुझे याद है कि किसी तरह गायों की घंटियां बजती थी…’। अनुज पुरोहित ने ‘आतंकवाद की औलादों को तुम जिंदा ही दफना दो, या तो फांसी चढ़वा दो या फिर जिंदा जलवा दो… और डा. राकेश डंगवाल ने सुनाया कि ‘कुछ आंसू हमने पी डाले कुछ पोछ लिए कुछ बहे नहीं, हमने फिर हंसना सीख लिया, ये सारा पुण्य तुम्हारा है तब भी तुमसे उजियार था
अब भी तुमसे उजियारा है’।
संस्कार इंटरनेशनल स्कूल निदेशक शालीन सिंह ने ‘मां तेरी रक्षा के लिए खून अपना बहाएंगे, डूबेगा दुश्मन का जहां सागर ऐसा बनाएंगे..। रेनू रतूड़ी ने सुनाया ‘चलो आज फूल चढ़ाते हैं शहीदों की समाधि पर, जिसने कर दी अपनी जान न्योछावर वतन के नाम पर।’ शोभा पांडेय ने सैनिक की शौर्य गाथा का वर्णन करते हुए सुनाया कि ‘स्नेह दुआएं स्मृति ले चले थे घर से…। इरा कुकरेती ने सुनाया कि ‘रणभेरी बजने को है ये वक्त नहीं सोने का, तुम भूलो घर के झगड़ों को ये वक्त नहीं है खोने का’। इस अवसर पर संस्था अध्यक्ष सुभाष भट्ट, उपाध्यक्ष डा. राकेश उनियाल, महामंत्री मितेश सेमवाल, राकेश सेमवाल, जितेंद्र मियां, ज्योतिका पांडेय, सविता भट्ट, गीता बागड़ी आदि मौजूद रहे। फोर-जी प्लस संस्था ने देश की रक्षा में बलिदान हुए जवानों के स्वजन को सम्मानित किया।
इस दौरान कारगिल बलिदानी, माओवादी, उग्रवादी व नक्सलियों से लड़ते हुए अपने प्राणों को न्योछावर करने वाले, ड्यूटी के दौरान बलिदान हुए जवानों के स्वजन और मेडल विजेता जवानों को सम्मानित किया।
