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शव यात्रा, पुतला और ‘मर गया’ नारे: कांग्रेस का असली चेहरा लोकतंत्र विरोधी साबित

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  शव यात्रा, पुतला और ‘मर गया’ नारे: कांग्रेस का असली चेहरा लोकतंत्र विरोधी साबित   लोकतंत्र हमें बोलने का अधिकार देता है। विरोध करने का साहस देता है। सवाल उठाने की ताक़त देता है। लेकिन लोकतंत्र हमें किसी इंसान की संवेदनाओं को कुचलने का अधिकार नहीं देता। जब किसी जीवित व्यक्ति—चाहे वह प्रदेश का मुख्यमंत्री हो या एक साधारण नागरिक—को प्रतीकात्मक रूप से “मरा हुआ” घोषित किया जाता है, उसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर तैरती हैं, ढोल-नगाड़ों के साथ उसकी ‘शवयात्रा’ निकाली जाती है, तो यह केवल राजनीतिक असहमति नहीं रह जाती। यह एक गहरी मानवीय क्रूरता बन जाती है। दुर्भाग्य से, यह तरीका कुछ राजनीतिक दलों की आदत बन चुका है। विपक्ष में बैठी कांग्रेस और उसकी कुछ शाखाएँ ऐसी घिनौनी राजनीति कर रही हैं—व्यक्तियों के खिलाफ अपमान, प्रतीकात्मक मौत का तमाशा और निजी जीवन पर हमला। यह केवल राजन...